Tuesday, January 6, 2009

नव संकल्प एक जीवन का ..

वक़्त गुजरता, बिताता, नहीं बंद तालो में दिन हो रहे हैं तब्दील सालों में .....
दशक बढ़ते फैलते शतकों में बदले बिता एक बड़ा वक़्त युग के युग निकले ........
कभी नए साल के पहले की शाम या जनम-दिन की सुबह की आहट
याद दिलाती की लो एक साल और बीत गया इस जीवन के अनसुलझे सवालो में ........
मेरी लम्बाई नहीं बढ़ी है कभी आशा की हालाँकि चोडाई जरोर बढ़ी है निराशा
की फिर वही खडा हूँ उसी मुकाम कर ......
बीते पलों को फिर दफ़न कर लेता हूँ
फिर लेता हूँ एक नया संकल्प नव,युगल,सजल उत्कृष्ट जीवन का .....

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